चिट्ठी-1. प्रभू जी आपने T-20 क्यों बनाया?

प्रभू जी आपने T 20 क्यों बनाया? आपने Bradman, Gavaskar बनाये, आपने medium pacer कुंबले को और फिरकी Warne बनाया, आप स्वयं सचिन के रुप में साक्षात हुए, कितनी अच्छी बात है। आपने श्वेत कपड़ों को रंगा और लाल गेंद को श्वेत कर one day बनाया, आपने sledging और match fixing बनाये, कोई नहीं, फिर आपने शोएब अख़्तर और Andrew Symonds को भी बनाया, चलो वो भी क्षमा योग्य है, लेकिन आपने T 20 क्यों बनाया ?
आप ही भुगतोगे प्रभू जी, मैंने तो इसी दुनिया में रहना है आपकी वो दुनिया उजड़ जायेगी, कहाँ जाओगे?
देखिये, माना की ये कलजुग है, ढ़ेर सारे झूठ में थोड़ा सा भी सच हो तो आपकी दाल रोटी चल जायेगी, लेकिन इस जग में अगर सिर्फ़ और सिर्फ़ झूठ ही बचा तो आप का क्या काम, थोड़ा सोचो, ये T 20 झूठ के अलावा है क्या? मक्कारी की दाल गल रही है और आप भी साथ में तालम ताला हो, आपके भले के लिये ही चेता रहा हूँ।
सोचो पहले test match होते थे… Marshall दौड़ता हुआ आता था.. Gavaskar duck करता था या pull, और अब Dale Steyn उससे भी तेज़ दौड़ कर आता है और दिल(शान) scoop करता है, ये क्या है प्रभू जी!

India Australia का Eden garden का वो match याद करिये जिसमें follow on के बावजूद हम जीते, लच्छू के 281 याद है ना प्रभू जी, अब कहाँ से देखोगे वैसी जादुई क्लाइयों का कमाल, कहाँ से देखोगे batsman के पीछे 3 slip, 1 gully, 1 point, पूरा पूरा दिन wicket पे अँगद के पाँव की तरह टिक के match बचाना, अब देखो अँगद बेदी को। अब कहाँ सुनोगे Richie Benaud, Boycott को या फिर Tony Greig द्वारा ear rings की चर्चा, अब सुनना मंदिरा बेदी को।
Cricket एक आध्यात्मिक खेल था प्रभू जी, बल्कि cricket स्वयं में ही आध्यात्म था, मानव का हर गुण दोष सामने उभर कर आता था, जो तपता था वो कुंदन बन कर निकलता था, और जो नहीं वो स्वाहा हो जाता था। और अब आध्यात्म से ये हवस बन गया है। रंग बिरंगे कपड़ों का fashion show बन गया है, गेंद और बल्ला तो बस आक्सिमक हैं। इसमें  गधे घोड़े साथ घांस चरते हैं, पूंछ हिला के एक दूसरे के उप्पर की मक्खियाँ भी उड़ाते हैं। सादे सफ़ेद कपड़ों में लोग देश के लिये खेलते थे, खिलाड़ी कहलाये जाते थे, अब owners उन्हे डंगरों की तरह खरीदते बेचते हैं, बंदरों की तरह नचाते हैं। पहले Botham की तस्वीर cigarette और beer के साथ आती थी क्या शान, क्या रौब , आज के ये खिलाड़ी शराब पी के मुजरा करते हैं, उनके लिये जो post match parties में 30 हज़ार की टिक्कस खरीद के आये हैं। अब मोदी सरीखे cricket के लिये देश को बेचने के लिये तैयार हैं। पहले लोग cricket की सूक्ष्म बातों को भी समझते थे, cover और on drive का फ़र्क पहचानते थे, yorker और googly की परख थी उन्हे, अब मैदान पे कुछ भी हो, आपकी team हारे या जीते लोग तालियाँ पीट रहे हैं, cheer-leaders को देख सीटियाँ मार रहे हैं। पहले अपनी team को हारता देख हर कोई आपको याद करता था, अब कौन करेगा…… आप भी तो कहीं… नहीं नहीं ..मैं ये नहीं मान सकता कि आपने cheer leaders को देखने के लिये T 20 बनाया, उसके लिये तो आपके पास और बहुत उपाय होंगे, तो फिर T 20 क्यों बनाया। आप द्वारा बनाये आध्यात्म को ही खतरा है, आपकी ही सत्ता उजड़ेगी!
बदलाव आपकी ही प्रकृति का नियम है, मुझे इससे इन्कार भी नहीं, लेकिन यहाँ तो सब गुत्थम गुत्थमा है, ये T 20 खेल है कि तमाशा है, यहाँ तो ताक पर रखी हर मर्यादित आशा है।

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